अजमेर नगर निगम में 8वीं बार भाजपा का बोर्ड, अनामिका शर्मा बनीं मेयर
अजमेर में 8वीं बार बीजेपी का बोर्ड, अनामिका शर्मा बनीं मेयरः निर्दलीयों से गठजोड़ में भाजपा रही आगे
अजमेर। अजमेर नगर निगम में एक बार फिर भाजपा ने अपना बोर्ड बना लिया है। मेयर पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। छह मतों के अंतर से जीत के साथ अनामिका शर्मा अजमेर की नई मेयर बन गई हैं।
नगर निगम के 80 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी। भाजपा के 32 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद जीते थे। बोर्ड बनाने के लिए 41 मतों का बहुमत जरूरी था। ऐसे में मेयर चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
32 पार्षद, लेकिन अनामिका को मिले 43 वोट
मेयर चुनाव के अंतिम नतीजे में भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के निर्वाचित 32 पार्षदों की संख्या से 11 अधिक यानी कुल 43 वोट मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले, जो कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों की संख्या के बराबर हैं। हालांकि मतदान गुप्त होने के कारण आधिकारिक तौर पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि किस निर्दलीय पार्षद ने किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया।
इस परिणाम के साथ अजमेर नगर निगम में लंबे समय से चला आ रहा भाजपा का बोर्ड बरकरार रहा। चुनाव से पहले भाजपा लगातार आठवीं बार नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही थी।
पहली बार लड़ा चुनाव, पहली ही पारी में बनीं मेयर
अनामिका शर्मा के लिए यह चुनाव खास रहा। उन्होंने पहली बार नगर निगम चुनाव लड़ा और वार्ड संख्या 3 से पार्षद निर्वाचित हुईं। इसके बाद भाजपा ने उन्हें मेयर पद का प्रत्याशी बनाया और पहली ही चुनावी पारी में वह शहर के सर्वोच्च नगरीय पद तक पहुंच गईं।
अनामिका शर्मा राजनीतिक परिवार से जुड़ी हैं। वह भाजपा नेता सीताराम शर्मा की पुत्रवधू हैं, जबकि उनके पति मनीष शर्मा अजमेर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं।
जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। अनामिका शर्मा की जीत के साथ ही वार्ड चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस नगर निगम में अपना मेयर नहीं बना सकी और किरण गढ़वाल को हार का सामना करना पड़ा।
अजमेर नगर निगम का यह चुनाव शुरुआत से ही रोचक रहा। कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए केवल चार अतिरिक्त मतों की जरूरत थी, जबकि भाजपा को अपने 32 पार्षदों के अलावा कम से कम नौ अतिरिक्त वोट चाहिए थे। अंतिम मतदान में भाजपा प्रत्याशी ने 43 मत हासिल कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया और नगर निगम की सत्ता अपने पास बरकरार रखी।


