जोड़ा फूल न ममता को मिला ना ऋतब्रत को, सिंबल के लिए दो पार्टियों की लड़ाई में तीसरे का फायदा
पश्चिम बंगाल में जो पार्टियां अभी विपक्ष में थोड़ी पकड़ रखती हैं उनके पास कोई जाना पहचाना सिंबल नहीं है और जिनके पास है उनकी जमीन पर उतनी पकड़ नहीं है. जाहिर है इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस आधिकारिक रूप से दो फाड़ हो गई है, कम से कम चुनाव आयोग की नजरों में. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी वाली तृणमूल कांग्रेस को अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया है. ममता बनर्जी की तरफ से पार्टी के लिए तीन विकल्प दिए थे ममता तृणमूल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस ममता और तृणमूल ममता कांग्रेस. वहीं चुनाव चिह्न के लिए फुटबॉल खेलता युवक और क्रिकेट बैट जैसे चिह्न थे, जिसमें से ममता बनर्जी को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया गया है. जबकि ऋतब्रत बनर्जी ने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, वेस्ट बंगाल तृणमूल कांग्रेस और नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न के लिए लिफाफा, टार्च और पेंसिल बॉक्स के नाम दिए थे. इसमें से उन्हें डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस का नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न मिला है. ममता बनर्जी का अपना पुराना चुनाव चिह्न, जिसे बंगाल में जोड़ा फूल कहा जाता है, उसे ममता ने अपने हाथों से पेंटिंग करके बनाया था, क्योंकि उन्हें पेंटिंग का शौक रहा है और वो अच्छी पेंटर हैं. आज के दिन 28 साल के बाद उनके अपने पुराने चुनाव चिह्न से नाता टूट गया है. ममता बनर्जी ने फुटबॉल खेलते युवक का चुनाव चिह्न शायद इसलिए भी लिया है कि बंगाल में फुटबॉल के लिए लोगों में दीवानगी है और सभी लोग चाहे वो अमीर हों या गरीब, फुटबॉल जरूर खेला होगा. यहां तक कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी कह चुके हैं कि वो पहले फुटबॉलर ही बनना चाहते थे. ऋतव्रत बनर्जी को मिला लिफाफा चुनाव चिह्न वहीं ऋतव्रत बनर्जी की पार्टी का नाम डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस होगा और चुनाव चिह्न लिफाफा. इस पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि ऋतब्रत की पार्टी का गठन ही लिफाफा लेकर किया गया है, इसलिए उन्होंने ये चुनाव चिह्न लिया है. वैसे कल्याण बनर्जी का कहना है ऋतब्रत तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न जोड़ा फूल लेना चाहते थे, जिसमें वो सफल नहीं हो सके और अब तृणमूल कांग्रेस इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएगी, जहां इसी तरह के मामले जो कि शिवसेना से जुड़ा हुआ है बहस चल रही है.